गीत खुशी से गायें(छठी मैया)

 चार दिवस के महापर्व को,मिलकर सभी मनाये ।

सूर्य देव की बहना के हम,गीत खुशी से गायें।


प्रथम दिवस में नहाय खाय का,मूल गया बतलाया।

शुद्ध सात्विक कद्दू शब्जी,दाल भात बनवाया।

सायंकाल को बैठ वृती जन,प्रभु को भोग लगायें।

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।


चावल और गन्ने के रस की, बने शाम को खीर।

परसादी की खीर रोटियां, बदल रहीं तकदीर।

द्वितीय दिवस में खरना को हम,सिर्फ शाम को खायें।।

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।


अगले छत्तीस घण्टे की है, सुनलो अजब कहानी।

रहें निर्जला सभी उपासक,छुएं न बिल्कुल पानी।

मिलकर बनता गज़ब  ठेकुआ,जिसका भोग लगायें।

सूर्य देव की बहना के हम,गीत खुशी से गायें।


बनी बांस की एक टोकरी, जिसको दउरा कहते।

पंच फलों को इसमें लेकर,शरण घाट की गहते।

अस्ताचल गामी सूर्यदेव को,मिलकर अर्घ्य चढ़ाएं।

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।


पूर्व दिशा में मुँह करके ही, खड़े सलिल में होते।

सूर्योदय का अर्चन करने, ध्यानमग्न हो खोते।

चतुर्थ दिवस में सिर्फ व्रती ही,पूर्ण नियम अपनाएं।

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।


पूजा के उपरान्त ग्राम को, सभी व्रती जन आते।

पीपल की पूजा करके ही,सही विधान अपनाते।

और दुग्ध का शर्बत पीकर, जीवन सफल बनायें।

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।


छठ उत्सव के नियम कायदे, सभी भक्त जन मानें।

सुख शैय्या का त्याग करें,सिले वस्त्र ना जानें।

कम्बल चादर और भूमि  पर,अपनी रात बिताएं

सूर्य देव की बहना के हम गीत खुशी से गायें।

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