मुक्ति(कहानी)
*मुक्ति* ------------------------------------ (एक हकीकत पर आधारित कथा) आज अनुपम बड़ी प्रसन्न थी साढ़े छः महीने के घोर शारिरिक कष्ट सहने के उपरांत ऑपरेशन कक्ष में जाते हुए अपने पति प्रवीण से कहा था- "मैं जल्दी ठीक होकर वापिस आऊँगी, आज मुझे घोर शारिरिक पीड़ा से मुक्ति मिल जाएगी।" प्रवीण इतना कह सका- "मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करूँगा अन्नू।" हाथ हिलाते हुए अनुपम अंदर चली गयी। प्रवीण के मन में हर्ष और विषाद के मिश्रित भाव जन्म ले रहे थे। असमंजस इस बात का था कि बच्चा कम दिनों का होने के कारण बचेगा या नहीं। इन साढ़े छः महीनों में केवल अनुपम ने कष्ट ही नहीं झेले थे बल्कि उसने भी अपना तन मन धन सब कुछ दाँव पर लगा दिया था। अनुपम भी इस पीड़ा को झेलकर ऊब चुकी थी। डॉक्टर के द्वारा उसे पूर्णतया बेडरेस्ट ही बताया था। आखिर बेडरेस्ट भी कितने दिन कर सकती थी, उससेउकता चुकी थी। अनुपम के लिये यह पीड़ा असहनीय थी तो प्रवीण के लिये भी कष्टकारक हो चुकी थी। आज सुबह ही डॉ ने सलाह दी थी "अनुपम का अभी ऑपरेशन करना ही श्रेयस्कर होगा अन्यथा दोनों से जोखिम उठाना उठ...