आखिरी मुस्कान -समीक्षा
प्रख्यात कवि, उपन्यासकार एवं अंतराष्ट्रीय शब्द सृजन मंच नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा मेरे अभिन्न मित्र साहित्यकार डा राजीव पाण्डेय जी के ऐतिहासिक उपन्यास "आखिरी मुस्कान " की भावपूर्ण समीक्षा.... "आखिरी मुस्कान " अंतस को झकझोरने वाली अद्वितीय कृति ****************************** ***************** हिंदी साहित्य की गहराई में जाकर शब्दों से खेलते हुए, लेखक ने मनु और मधुरेश के रिश्ते की शुरुआत अत्यंत ही आध्यात्मिक और साहित्यिक अंदाज में शुरू की l हिंदी के जटिल लेकिन सुघर शब्दों का आश्रय लेते हुए उपन्यासकार ने अपनी साहित्यिक परिपक्वता का बोध पाठकों कराते हुए लिखा कि..... " भावुकता अंतस का आभूषण है और आभूषणों की दमक से कोई भी अछूता नहीं रह सकता"मधुरेश बोला। उपन्यास के प्रथम भाग में पुरुष एवं स्त्रियों के अधिकारों और कर्तव्यों का मंथन करते हुए,मधुरेश और मनु के विचार, आपस में प्रश्नोत्तर करते हुए प्रतीत होते हैं l उपन्यास के प्रारंभ से ही लेखक ने उपमा, उपमेय और अलंकारों का आश्रय लेते हुए, प्रत्येक संवाद को साहित्य सजाने पर जोर दिया है, जैसे... " पिछले...