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हम उनको नमन करें

 *हम उनको नमन करें*  पंचतत्व  से  निर्मित  काया सुन्दर तन मन जीवन पाया रोम  रोम है  ऋणी  तुम्हारा रग  रग में अस्तित्व समाया वही सृजन के बीज आज तक, महक रहे हैं इस उपवन में। हम उनको नमन करें। जीवन की हर कला सिखायी, दुनिया दारी  भी समझायी, कदम हमारे बहक गये तो, आगे बढ़ उंगली पकड़ायी। कठिन परीक्षा के जीवन में, बड़ी  भूमिका संसोधन में। हम उनको नमन करें। कंधों  पर सब नगर  घुमाया, मुश्किल पथ को सुगम बनाया बालक मन ये रूठ न  जाये घोडा बनकर तभी  खिलाया डांट डपट के साथ साथ में,प्यार मिला था सम्बोधन में। हम उनको नमन करें। पीडाओं  को  हरने  वाले, सब जिद पूरी करने वाले, इस जीवन के आलेखन में रंग  अनोखे  भरने वाले, हमें सिखाया बात बात में,चूक न हो जीवन यापन में। हम उनको  नमन करें।