तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
*तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।* ------------------------------------- बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें। तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें। स्वतंत्रता के हवन कुंड में, समिधा बनकर कूदे। आजादी के सपने पाले,अपनी आंखें मूंदे। एक मंत्र के उच्चारण ने,मिलकर हुंकार भरी । वीरों के विकराल रूप से, प्रभुसत्ता बहुत डरी। संकल्पों का सिर पर बांधा,तब केसरिया बाना। बांध मुष्टिका ग्रह त्यागकर,अपना सीना ताना। राष्ट्र मुक्ति के आव्हान से,सोया भारत जागा। और गुलामी के बंधन का,बिखरा इक इक धागा। भारत का इतिहास अमिट है,इसकी अलख जगानी। भारत के कोने कोने में ,यह गाथा पहुंचानीं। सकल विश्व को शिक्षा देकर,विश्व गुरु कहलायें।(1) बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें। तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें। कुछ गुमनाम शहीदों के हम ,करवाते हैं दर्शन, जिनके बलिदानों से महका,अपना सूना आंगन। सत्याग्रह में साथ दिया था,सेनापति बापत ने। पोटी श्री रामुलु, पीर अली ,पूत जने भारत ने। सत्तावन के संघर्षों में ,जब संख्या थी खासी । पीरअली के साथ मिली थी,तब चौदह को फांस...