होली की कविताएं
फागुन की परिभाषा (गीत) गली -गली के कंकड़ बोलें,प्रेम परक परिभाषा। सर्व मास संवत के बोलें,फागुन की अभिलाषा। झीलें पोखर गड्ढे खाली,खाली गाँव की नाली, लाली लाली सों हैं काली, दे संग गाली ताली, साली की तो हालत माली, शांत हुई जिज्ञासा। गली गली के--------------। सागर की रेती पर लहरें, लिखे नाम को चूमें, पाकर छुअन लिखे नामों की,मस्त बहारें झूमें, तरह तरह के रंग बदन पर, कैसे करें खुलासा। गली गली के--------------। गाँव गाँव हैं नन्द गाँव अरु ,नगर नगर बरसाने, नव दुल्हन को देख वृद्ध जन,मन ही मन हरषाने, परिचित औरअपरिचित सब ही,रंग से करें तमाशा। गली गली के--------------। गालन गाल गुलाल देखकर,है घायल पिचकारी, पिचकारी से काजल गीला, है पागल सिसकारी, तन हो जाता सराबोर पर, मन रह जाता प्यासा। गली गली के--------------। एक होली गीत तन मन अपने रंग रंग दे। अधर सुधा रस पिला भंग दे। वर्षों की इस अतृप्त धरा पर, नयन नयन से मिटा जंग दे इस होली पर ऐसा प्रियवर खोज रही हैं मेरीआँखें। अंग अंग पुलक...