हम कुछ नया करेंगे
हम कुछ नया करेंगे ----------------------------- आशाओं की नई भोर में, नूतन पंख सजेंगे। सुर्ख गुलाबी पंखुड़ियों के,फिर से दिन बहुरेंगे। हम कुछ नया करेंगे। चिड़ियों के कलरव से सूना,आँगन नहीं सुहाता। और सवेरे कागा भी कब, अपना वचन निभाता। उम्मीदों पर मिठ्ठू कायम, स्वागत कर हरसेंगे। हम कुछ नया करेंगे। बिना कथानक के सो जाते, दादी माँ के सपने। सन्ध्या वन्दन का सुर धीमा,अधर लगे हैं कंपने। बूढ़ी काकी की लाठी में, फिर से पर निकलेंगें। हम कुछ नया करेंगे। भोर सुहानी रोती देखी, रातें लें अंगड़ाई। पुरवा के यौवन पर रीझी,पछुवा की तरूणाई। नयी तूलिका के आँगन में ,नव अरमान भरेंगे। हम कुछ नया करेंगे। मुस्काती कैक्टस की मूँछे,घर की बालकनी में। तुलसी के गमलों से आयें, सांसे नागफनी में। रेगिस्तानी वातायन में, गन्धित पुष्प खिलेंगें। हम कुछ नया करेंगे। चौपालों पर सन्नाटों ने, अपना डेरा डाला। अगियानों ने दम तोड़ा है,पीक...