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सिलेंडर ने नाक कटवा दी(व्यंग्य)

 *सिलेण्डर ने नाक कटवा दी* उन्नत ललाट ,उचके हुए कंधे,लम्बी कद काठी,रौबदार मूँछे, बगबगाता हुआ क्रीजदार  कुर्ता पायजामा,हाथ में मंहगी वाली घड़ी, पैरों में फैशनेबल जूतियां, गले में  मोटी पट्टी वाला गमछा, सिर पर नुकीली टोपी धारण किये हुए अपनी कोठी के बाहर लोन में कुर्सी पर विराजमान कस्बे के प्रतिष्ठित चौधरी सुल्तान सिंह सामने रखा हुआ हुक्का गुड़गुड़ाते हुए बार-बार अपनी हाथ की घड़ी पर नज़र डाल रहे थे। ऐसा लग रहा था की सज-धजकर कहीं जाना  चाहते हैं या किसी का बेसब्री से इंतजार कर रहें हैं। उन्होंने अपनी जेब से महंगा वाला आई फोन निकाला और गांव के नाई को  फोन मिलाते हुए बोले, "क्या हुआ महुआ,मैं तो बहुत देर से प्रतीक्षा  कर रहा हूँ ।"  राम राम करते हुए महुआ  बोला " बस अभी आया चौधरी साहब। लड़की वाले आ गए हैं,उन्हें लेकर ही आ रहा हूँ।"  चौधरी साहब सगर्व  मूंछों ही मूंछों में मुस्कुराए कि आज उनके लड़के के लिए रिश्ते वाले आ रहे हैं । उन्होंने इधर-उधर देखा सामने लगी  मेज पर स्वागत के लिये रखे गए सामान  पर नजर डाली कोई कमी तो नजर नहीं आ रही है।...