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चन्दा के घर जाने की

 संकल्पों के हम साधक हैं, डरते कब विपदाओं से। नया कदम ही बढ़ जाता है,  सीखा है गाथाओं से। वर्ष करोड़ो की अभिलाषा, चन्दा के घर जाने की। डोरवेल को बजा दिया है, बस देरी अंदर जाने की। अटल इरादों के स्वामी है, चट्टानों से टकराते। मुट्ठी में आकाश किया है और समंदर पी जाते। तीन डगों में तीन लोक को, हमने सदा ही नापा है। सिंह गर्जना सुनकर अपनी, भूमंडल भी काँपा है। पँख  दिखाने को होते हैं, उड़ान हौसले भरते हैं। उनके सम्मुख दुनिया वाले, देखे पानी भरते हैं। वो ही विक्रम कहलाता है,  सम्परकों से दूर रहे। अविचल अडिग संयमी होकर, अपनी गाथा स्वयं कहे। भारत माता का यश गौरव, और मान  बढ़ जाता है। चन्दा मामा  की चौखट पर चन्द्रयान चढ़ जाता है। हुए जनक शून्य के हम ही, गायन उन महिमाओं का। दुनिया लोहा मान रही है, वैज्ञानिक प्रतिभाओं का। सिद्ध हमें करने को कोई रही न बिल्कुल शंका है। दुनिया भर में देखो बजता  अब भारत का डंका है। आटोग्राफ कोई मांगता, और बॉस बतलाते हैं। इसीलिए हम आज तलक भी, विश्व गुरू कहलाते हैं। डॉ राजीव पाण्डेय

अपने आप झरें

 *अपने आप झरें* ----------------------- अपने मन की करुण कथा को, जब अभिव्यक्त करें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें। मेरे मनभावों को पढ़ना, बिल्कुल छोड़ दिया। प्रीति रीति के दरवाजों से, रिश्ता तोड़  दिया। गली गली में रौद्र रूप की,  परतें अब उघरें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें। जंगल से शिखरों तक हमने,कड़वा घूँट पिया। संस्कार के घर मे रहकर, परहित धर्म जिया। घनीभूत पीड़ा को लेकर, कब तक हम विचरें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें। प्राणवायु का गला घोंटना, युग की परिपाटी। सुबक रही है अवशोषण में, अब पर्वत घाटी। अकुलाहट के मौन अधर पर, संवेदन उभरें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें। आशाओं की बूढ़ी अँखियां ,उगल रही पानी। करुण कहानी कहने आई,हिमनद की नानी। घोर घटा के यौवन रथ पर, अल्कावलि बिखरें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें। कठिन परीक्षा काल भोगकर, संयम ना छोड़ा। दायित्यों के परिचालन में ,मुख को ना मोड़ा। तीब्र तड़ित सह वारिद मुख पर, गर्जन विकट धरें। मेघ नयन के अश्रु इस लिये, अपने आप झरें।

डॉ राजीव पाण्डेय हिन्दी भूषण सम्मान से सम्मानित

 *साहित्यकार डॉ राजीव पाण्डेय को मिला हिन्दी भूषण सम्मान* जापान की प्रतिष्ठित संस्था हिन्दी कल्चरल सेंटर टोक्यो द्वारा वर्ष 2023 के लिये गाजियाबाद से  हिन्दी साहित्य के वरिष्ठ साहित्यकार वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ  राजीव पाण्डेय को हिन्दी भूषण सम्मान से अलंकृत किया गया। जापान हिन्दी कल्चरल सेंटर द्वारा 'हिन्दी की गूँज' मासिक पत्रिका भी प्रकाशित होती है। इस  वर्ष हिंदी के लिये सराहनीय कार्य करने वाले पूरे विश्व से पंद्रह रचनाकारों के पूर्ण विवरण सहित उनकी चयनित रचनाओं को 'गूँज रही हिन्दी' में स्थान दिया । जापान हिन्दी कल्चरल सेंटर  टोक्यो की निदेशक डॉ रमा शर्मा जिनके प्रधान सम्पादन में पत्रिका एवं इस ग्रन्थ का प्रकाशन हुआ है। भारत की तरफ से हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर विनोद पाण्डेय ने इस ग्रन्थ में सम्पादन की भूमिका का निर्वहन किया है। 9 जुलाई को श्री जी फाउंडेशन द्वारा राकेश मार्ग गाजियाबाद में आयोजित पुस्तक विमोचन सम्मान समारोह एवं काव्य सन्ध्या में इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से डॉ राजीव पाण्डेय को सम्मानित किया गया । इस अवसर पर अमेरिका से मुख्य अतिथि के रूप मे...