संदेश

जून, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आखिरी मुस्कान समीक्षा

 "आखिरी मुस्कान " अंतस को झकझोरने वाली अद्वितीय कृति ***********************************************   हिंदी साहित्य की गहराई में जाकर शब्दों से खेलते हुए, लेखक ने मनु और मधुरेश के रिश्ते की शुरुआत अत्यंत ही आध्यात्मिक और साहित्यिक अंदाज में शुरू की l हिंदी के जटिल लेकिन सुधर शब्दों का आश्रय लेते हुए उपन्यासकार ने अपनी साहित्यिक परिपक्वता का बोध पाठकों कराते हुए लिखा कि..... " भाउकता अंतस का आभूषण है और आभूषणों की दमक से कोई भी अछूता नहीं रह सकता मधुरेश बोला " उपन्यास के प्रथम भाग में पुरुष एवं स्त्रियों के अधिकारों और कर्तव्यों का मंथन करते हुए,मधुरेश और मनु के विचार, आपस में प्रश्नोत्तर करते हुए प्रतीत होते हैं l उपन्यास के प्रारंभ से ही लेखक ने उपमा, उपमेय और अलंकारों का आश्रय लेते हुए, प्रत्येक संवादों को साहित्य सजाने पर जोर दिया  है, जैसे... " पिछले कई घंटों से हृदय में संगीत की देवी की प्रतिमा को मन में सजाएं बैठा हूं और आप कह रही हैं कि किससे बातें कर रहे हैं " इस बहुपक्षीय उपन्यास के प्रारम्भिक पक्ष से यदि हम चर्चा प्रारम्भ करें,तो मधुरेश के जीवन ...

मन की पाँखें की समीक्षा

 आज डॉ रंजना वर्मा जी महाराष्ट्र से यह समीक्षा प्राप्त हुई। बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद ।आप सबकी नजर ' मन की पाँखें ' : हाइकु संग्रह           एक दृष्टि में हाइकुकार:डॉ राजीव कुमार पाण्डेय प्रकाशक-हर्फ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली पृष्ठ-105 मूल्य :175 रुपये समीक्षिका- डॉ रंजना वर्मा डॉ. राजीव कुमार पांडेय जी का हाइकु संग्रह ' मन की पाँखें' देखने पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ . पुस्तक में संग्रहीत सभी हाइकु रचनाकार की बेहतरीन प्रस्तुतियां हैं . पुस्तक के प्रारम्भ मे कवि ने पारम्परिक ढंग से माँ शारदा की वंदना से किया है . सत्य है , माँ सरस्वती की कृपा के लिये तो सभी साहित्यकार लालायित रहते हैं . हंसवाहिनी माँ धवल धारिणी कृपा रस दो । डॉ राजीव पाण्डेय जी एक सहृदय कवि हैं जिनका मन प्रकृति के विभिन्न रूपों से प्रभावित होता है . एक ओर वह प्रकृति की सुरम्य वादियों में डूब जाना चाहता है तो दूसरी ओर मानव द्वारा प्रकृति के अनुचित दोहन के प्रति विद्रोह से भी भर उठता है . जीवन के विभिन्न रूप उसे आकर्षित करते है. कवि ने प्रकृति को भिन्न भिन्न रूपों का अवलम्बन लेकर हाइकु लिख...

अनुराग मिश्र गैर के ग़ज़ल सँग्रह

अद्भुत गज़लों का गुलदस्ता - खेत के पाँव ----------------------------------------------- ख्याति प्राप्त शायर ज़नाब अनुराग मिश्र 'ग़ैर'  के सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह 'खेत के पाँव' में महबूबा महबूब की शाइरी भी है तो आज की विद्रूपता का असल चेहरा भी है।इश्क से मानवता तक की ग़ज़लों का संग्रह न केवल पठनीय है बल्कि संग्रहनीय भी है।  पुस्तक की समीक्षा से पूर्व ग़ज़ल क्या है इस पर चर्चा कर लेना समीचीन है। हिन्दी काव्य शास्त्र का आधार पिंगल या छन्दशास्त्र है लेकिन ग़ज़ल क्योंकि सबसे पहले फ़ारसी में कही गयी इसलिये इसके छ्न्द शास्त्र को इल्मे-अरूज़ कहते है। एक बात स्पष्ट करना आवश्यक है कि बिना बहर क ग़ज़ल आज़ाद नज़्म होती है ग़ज़ल कतई नहीं। और आज़ाद नज़्म का काव्य में कोई वजूद नहीं है। लेकिन शायर अनुराग मिश्र की गज़लें बहर में हैं। वर्णों का समूह रुक्न और रुक्न का बहुवचन अरकान होता है। इन्हीं अरकानों के आधार पर फारसी में बहरें बनीं। मूल रूप से आठ अरकान हैं- फ़ा-इ-ला-तुन(2-1-2-2) मु-त-फा-इ-लुन((1-1-2-1-2) मस-तफ-ई-लुन((2-2-1-2) मु-फा--ई-लुन(1-2-2-2) मु-फा-इ-ल-तुन(1-2-1-1-2) मफ-ऊ-ला-त(2-2-2-1) फा-इ-लुन(2-1-...

समीक्षाएं

तुमसे क्या छिपाना-राजेश कुमार सिंह,लखनऊ  *क्षयमुक्त भारत की परिकल्पना में प्रेम का तड़का लगाता है उपन्यास  'तुमसे क्या छिपाना'।* उपन्यास वर्तमान युग की लोकप्रिय साहित्यिक विधा है आज की युग चेतना इतनी गुफित और असाधारण हो गयी है कि इसे साहित्य के किसी अन्य रूप में इतने आकर्षक और सहज रूप में प्रस्तुत करना  दुष्कर है किन्तु उसे उपन्यास पूरी सम्भावना और सजीवता के साथ उपस्थित करता है।  इसलिए अनेक विद्वानों ने उपन्यास को आधुनिक युग का महाकाव्य कहा है।  उपन्यास जीवन के लघुतम और साधारणतम तथ्यों को भी पूर्ण स्वच्छता तथा स्पष्टता के साथ प्रस्तुत करता है। उपन्यास शब्द उप समीप तथा न्यास  थाती के योग से बना है जिसका अर्थ है (मनुष्य )के निकट रखी  वस्तु अर्थात वह वस्तु  या कृति जिसको पढ़कर ऐसा लगे कि  हमारे ही जीवन का प्रतिबिंब है उपन्यास। संस्कृत में "उपन्यास: प्रसादन:।" अर्थात प्रसन्न करने को ही उपन्यास कहते हैं। एक अन्य परिभाषा के अनुसार -  "'उपपत्ति कृतोहार्थ उपन्यास: सनकीर्तित।" कहने का अर्थ है किसी अर्थ को युक्ति युक्ति रूप से उपस्थित करना उपन्यास क...