आखिरी मुस्कान समीक्षा
"आखिरी मुस्कान " अंतस को झकझोरने वाली अद्वितीय कृति *********************************************** हिंदी साहित्य की गहराई में जाकर शब्दों से खेलते हुए, लेखक ने मनु और मधुरेश के रिश्ते की शुरुआत अत्यंत ही आध्यात्मिक और साहित्यिक अंदाज में शुरू की l हिंदी के जटिल लेकिन सुधर शब्दों का आश्रय लेते हुए उपन्यासकार ने अपनी साहित्यिक परिपक्वता का बोध पाठकों कराते हुए लिखा कि..... " भाउकता अंतस का आभूषण है और आभूषणों की दमक से कोई भी अछूता नहीं रह सकता मधुरेश बोला " उपन्यास के प्रथम भाग में पुरुष एवं स्त्रियों के अधिकारों और कर्तव्यों का मंथन करते हुए,मधुरेश और मनु के विचार, आपस में प्रश्नोत्तर करते हुए प्रतीत होते हैं l उपन्यास के प्रारंभ से ही लेखक ने उपमा, उपमेय और अलंकारों का आश्रय लेते हुए, प्रत्येक संवादों को साहित्य सजाने पर जोर दिया है, जैसे... " पिछले कई घंटों से हृदय में संगीत की देवी की प्रतिमा को मन में सजाएं बैठा हूं और आप कह रही हैं कि किससे बातें कर रहे हैं " इस बहुपक्षीय उपन्यास के प्रारम्भिक पक्ष से यदि हम चर्चा प्रारम्भ करें,तो मधुरेश के जीवन ...