नारी तुझे प्रणाम
*नारी तुझे प्रणाम*
कहीं श्रोत है सरिता जैसा, कहीं सिंधु गम्भीर।
अनुपम कृति है भूमण्डल की हरती जग की पीर।
नारी तुझे प्रणाम।
सदा उदय हो इस धरती पर,किया पूत बलिदान।
धर्म ग्रन्थ का पन्ना पन्ना भी , करता आज बखान।
स्मृतियों को ताजा करती, लक्ष्मी की शमशीर।
नारी तुझे प्रणाम।
त्याग समर्पण के किस्सों की गलियां बनी गवाह।
फिर भी अबतक नाप सकी ना,उनका प्रेम अथाह।
राधा के संग संग पूजित है, मीरा की तश्वीर।
नारी तुझे प्रणाम।
झंझावातों से टकराकर, सत्य कभी न हारा।
उसी अमरता के गुण गाता,अटल सत्य ध्रुवतारा।
है भक्ति में तल्लीन कयाधु ,कहीं सुनिति गम्भीर।
नारी तुझे प्रणाम।
पतिवृत के पालन करने में, भोगी कठिन तपस्या
उर्मिल अनुसुया संग डिगी ना, मन्दोदरी अहिल्या।
सीता के हाथों का तिनका, रावण सका न चीर।
नारी तुझे प्रणाम।
कहीं शून्य में खड़ी कल्पना,अपना झंडा लेकर।
बढ़ी सानिया और साइना,खुशियों की बलि देकर।
झूलन,सिंधु ,उषा अरु कर्णम, भारत की तकदीर।
नारी तुझे प्रणाम।
*डॉ राजीव पाण्डेय*
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