तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
*तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।*
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बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
स्वतंत्रता के हवन कुंड में, समिधा बनकर कूदे।
आजादी के सपने पाले,अपनी आंखें मूंदे।
एक मंत्र के उच्चारण ने,मिलकर हुंकार भरी ।
वीरों के विकराल रूप से, प्रभुसत्ता बहुत डरी।
संकल्पों का सिर पर बांधा,तब केसरिया बाना।
बांध मुष्टिका ग्रह त्यागकर,अपना सीना ताना।
राष्ट्र मुक्ति के आव्हान से,सोया भारत जागा।
और गुलामी के बंधन का,बिखरा इक इक धागा।
भारत का इतिहास अमिट है,इसकी अलख जगानी।
भारत के कोने कोने में ,यह गाथा पहुंचानीं।
सकल विश्व को शिक्षा देकर,विश्व गुरु कहलायें।(1)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
कुछ गुमनाम शहीदों के हम ,करवाते हैं दर्शन,
जिनके बलिदानों से महका,अपना सूना आंगन।
सत्याग्रह में साथ दिया था,सेनापति बापत ने।
पोटी श्री रामुलु, पीर अली ,पूत जने भारत ने।
सत्तावन के संघर्षों में ,जब संख्या थी खासी ।
पीरअली के साथ मिली थी,तब चौदह को फांसी ।
भारत माँ का झंडा लेकर जब मातंगिनी बढ़ती ।
भारत छोड़ो आंदोलन में ,गोरों की गोली चलती।
तारा रानी श्रीवास्तव के , था आंखों में सपना।
हमें सिखाती उनकी गाथा,गोली खाकर बढ़ना।
ऐसी शौर्य पराक्रम भाषा,जीवन मे अपनायें।(2)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
नेहरु तिलक गांधी लाला,शास्त्री लाल बहादुर
अपना फौलादी सीना ताने, थे पटेल जी आतुर।
रक्त धमनियों का जब खौला,शत्रु को ललकार दिया।
सहन शक्ति ने संयम तोड़ा,बढ़कर प्रतिकार किया।
रक्त बूँद से तिलक सुशोभित,अपनी खड्ग संभाली।
अरि की रक्त पिपासा लेकर, प्रकट हुई महाकाली।
क्रांति समर के महानायक हैं,मंगल पांडेय वीर।
राजगुरु सुखदेव भगत को, न फांसी करे अधीर।
आजादी के परवाने थे, चन्द्र शेखर आजाद।
नेताजी की हिन्द फौज का,करे खून सिंह नाद।
शांति पाठ के साथ जिव्हा पर,क्रांति मन्त्र को लाएं।(3)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
अपनी सन्तति पीठ बांधकर, बढ़ती लक्ष्मी बाई।
इतिहासों के पृष्ठों में भी, स्वर्णिम जगह बनाई।
चेनम्मा जी बेगम हजरत ,अरु भीकाजी कामा।
कमला नेहरू अरुणा आसफ,तजती अपनी यामा।
कहीं सुचेता कृपलानी थी,लक्ष्मी सहगल दुर्गा।
स्वातंत्र्य के महासमर में , बने फिरंगी मुर्गा।
भगत सिंह का साथ निभाती,अपनी दुर्गा भाभी।
हथियारों को करा मुहैया, भेष बना मायावी।
युद्ध क्षेत्र में कूद पड़ी थी, ले तलवार दुधारी।
अमिट नाम पन्नों में अंकित, वीरवती झलकारी।
वीर पुरूष के संग पूजित हों,भारत की ललनाएँ।(4)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
विश्व विजेता के सपने को ,पौरुष धूल चटाते।
हम गौरी के अभिमानों को,सत्रह बार मिटाते।
युद्ध भूमि में बलि होने की ,परिपाटी के पोषक।
उसको स्वर्ग भेजना सीखा,जो होते हैं शोषक।
स्वाभिमान की खातिर राणा,घास की रोटी खाते।
स्वामिभक्ति की रक्षा खातिर,चेतक जान लुटाते।
मुग़ल काल में नहीं डरे थे, छत्र साल बुंदेला।
मारवाड़ की शान बढाता, ,दुर्गा दास अकेला।
कहानी सुनकर बनना चाहते,बच्चे वीर शिवाजी।
जिनकी तलवारों से काँपे, औरंगजेब से काजी।
संकल्पों के सम्मुख पानी, भरती हैं बाधाएं।(5)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
आजादी के अमर गान को ,कवियों ने भी गाया।
भारत को वैभव दिलवाने, सोया भाग्य जगाया।
माखन जी के अंतर्मन की,कहे पुष्प अभिलाषा।
बुंदेले हर बोलों की जय,सुभद्रा जी की भाषा।
पानी में भी आग लगाते, श्रीधर जी महावीर।
रामनरेश, मैथिली पढ़कर, उठ जातीं शमशीर।
सारे जहां से अच्छा अपना ,गा रहें थे इकबाल।
जयशंकर दिनकर के साथी,नवीन ठोंकते ताल।
प्रेमचंद की अभिनव कृतियां,हैं भारत की थाती।
बंकिमजी की अमर गायिकी,शस्य श्यामला गाती।
राष्ट्रवाद की स्वर लहरी फिर,जिव्हा पर चढ़ जायें।(6)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
सत्य सनातन परिपाटी के,हम सब हैं गुण गायक।
नीव के ऊपर खड़ी इमारत, भार लिये महानायक।
दन्त ,शावकों के गिनते हैं, खेल खेल में बालक।
दिशा बोध के हम ज्ञाता है , हैं सच्चे अधिनायक।
प्रातः काल में विश्व शांति के, मंत्र यहीं पर गाते।
पुण्य भूमि के आरधन में, देव पुरुष झुक जाते।
पाप पुण्य में परिवर्तन को, नीर यहाँ पर बहता।
विजय मृत्यु पर पा जाता है, महा मृत्युंजय कहता।
अवतारों की पुण्य धरा का, रज कण भी चंदन है।
जो ललाट पर धारण करले, उसका अभिनन्दन है।
भारत माता के मंदिर में, मिलकर अर्घ्य चढायें। (7)
बलिदानों की अमर कथा को ,मुक्त कंठ से गायें।
तीन रंगों के ध्वज को लेकर,अम्बर तक फहरायें।
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