हम एक दीप जलायें

 *हम एक दीप जलायें*


ज्योति पर्व पर अपने अंदर, हम एक दीप जलायें।

अहंकार के सघन तिमिर में,नूतन आस जगायें।

हम एक दीप जलायें।


द्वार द्वार पर रोली अक्षत,

घर वन्दनवार सजें।

लक्ष्मी जी का स्वागत करने,

प्रेम के गीत बजें।

सारा जग ही अपना घर है,यही भाव अपनाएं।

हम एक दीप जलायें।



भाव स्वदेशी मन में लाकर,

तब बाज़ार करेंगे।।

भारत की मिट्टी से निर्मित,

घर के दीप जलेंगे।

अपने बन्धु बान्धवों को, आगे सदा बढ़ाएं।

हम एक  दीप जलायें।


फुलझड़ियों संग चरखी नाचे,

 पर इतना ध्यान रहे।

प्राणवायु अपनी पीड़ा को,

रो रोकर नहीं कहे।

प्रदूषण के संकट को हम अब ,घर से दूर भगाएं।

हम एक दीप जलायें।


छप्पन भोग हमारे घर में,

और पड़ौसी भूखा।

अधरों पर मुस्कान नहीं है,

 व्यवहार हमारा रूखा।

जिम्मेदारी यही हमारी,उसके घर भिजवाएं।

हम एक दीप जलायें।


दीपमालिका की गरिमा को,

सदा उच्च रखना है।।

डॉलर के कॉलर को नीचा,

हम सबको करना है।

राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ें हम, टैरिफ माल न लायें।

हम एक दीप जलायें



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