काश एक टिकट मुझे भी मिल जाती!
टिकिट का साइज क्या होता है,कैसी दिखती है,कैसे मिलती है,कब मिलती है आदि अनेक प्रश्न सबके मन में रहते हैं यही मेरे मन में भी है।
केवल टी वी, समाचार पत्रों में ही पढ़ते और सुनते हैं कि फलाने को फलानी पार्टी की टिकिट मिल गयी है। जिज्ञासा बरबस बढ़ जाती है कि सभी पार्टियों की टिकिट एक जैसी होती है? एक ही कलर की होती है ? साइज भी सबका समान होता है क्या?
आजकल लम्बी - लम्बी लाइन है टिकट पाने के लिये लेकिन टिकिट किसी एक को ही मिलेगी एक पार्टी से ऐसी व्यवस्था बताई जाती है । ऐसा भी बताया जाता है कि जिनका भाग्य (सूटकेस) अच्छा होता है उन्हें यह प्रसाद मिल ही जाता है। कई बार जमीन से जुड़े कार्यकर्ता को मिलती है। और कई बार एयरलिफ्ट कर ली जाती है। बेचारा जमीन वाला जमीन पर ही रह जाता है मन मसोसकर क्योंकि उसके पास उत्तम क्वालिटी का तेल, सूटकेस नहीं होता है, भाग्य भी अच्छा नहीं होता है और सबसे बड़ा जन्मजात दुर्भाग्य यह कि उसकी जाति उस कॉन्स्टिट्यूशन के वोटर्स से मैच नहीं करती अर्थात कम होते हैं। क्योंकि जाति नाम की व्यवस्था टिकिट के लिये यह बहुत बड़ी योग्यता है जो उसके वश में नहीं होती है।
मेरी जिज्ञासा ने एक बार इस अकल्पनीय विविधता भरी टिकिट के लिये ट्राई किया था । कई के दरवाजे गया लेकिन खाली हाथ लौट आया क्योंकि मेरे बायोडाटा में दंगा ,फसाद, बूथ कैप्चरिंग, जुलूस, धरना ,प्रदर्शन आदि का एक्सपीरियंस नहीं था इसलिए बैरंग लौटना पड़ा । मैं एक लेखक हूँ इसे योग्यता में शामिल नहीं किया गया। मैं कोई इलेक्शन लड़ने के लिये टिकिट नहीं माँग रहा था मैं तो केवल उसका साइज़ ,कलर, वेट आदि देखकर अपनी आत्मा को तृप्त करना चाहता था । लगता है इस जन्म में यह कामना पूरी होने वाली भी नहीं है। चलो कोई बात नहीं हम तो पुनर्जन्म में विश्वास करने वाले लोग हैं , और यदि अब कोई आकर ये सब बता देगा उसी से सन्तोष कर लेंगे। अनुभवी लोग बताते हैं कि सन्तोष ही सबसे बड़ा धन होता है।
खैर एक बात और ध्यान में आ रही है वो भी बताता चलूँ यदि नहीं बताई तो मेरे पेट में गुड़गुड़ाती रहेगी इसलिए बता रहा हूँ कोई एहसान नहीं कर रहा हूँ। ऐसा माना जाता है जो कि फलानी पार्टी की टिकिट मिल जाये तो जीत निश्चित है। इस टिकिट का भाव भी अधिक होता है । लेकिन एक पार्टी से एक को ही टिकिट मिलती है। इसलिए इस गंगा में एक ही आदमी एक बार मे डुबकी लगा सकता है एक पार्टी से।
कई बार पार्टी टिकिट देती है और उम्मीदवार लेने को तैयार ही नहीं होते हैं। मुझे तो ऐसी भी पार्टी ने अभी तक संपर्क नहीं किया।
टिकिट के लिये आजकल मारामारी है। जब लगता है कि टिकिट नहीं मिल रही तो वर्षो की आस्था को खूँटी पर टांग दिया जाता है और पाला बदलकर दूसरी पार्टी से टिकिट सुंदरी के दर्शन करने में सफलता हासिल कर ली जाती है। वक्त की नजाकत भी यही कहती है की कैसे भी मिले,टिकिट मिल जानी चाहिए। हद तो तब हो जाती है एक उम्मीदवार की टिकिट काटकर किसी अन्य को दे दी जाती है। उस बेचारे का क्या हाल होता है जिसके गले मे उंगली डालकर निवाला निकाल लिया जाए। खैर मेरा प्रश्न ये है कि वह व्यक्ति उस टिकिट को साबुत लौटाता है या गुस्से में आकर फाड़कर फेंक देता है। पार्टी उसके स्थान पर नई टिकिट बनाती है या उसे ही चिपका कर दूसरे को भेज दी जाती है। यह मेरे लिये गूढ़ प्रश्न है आप किसी को इसका उत्तर मालूम हो तो जरूर शेयर करियेगा ताकि मेरी जिज्ञासा भी शांत हो सकें। आजकल तो स्क्रीन शॉट का भी जमाना है यदि किसी को देखने को मिल जाये तो मुझे भी भेजिए ताकि मैं भी उसका दर्शन लाभ लेकर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर चिपका सकूँ।
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