आओ भजें राम का नाम


जिनकी दृष्टि मात्र से होता, इस जग का कल्याण।

उनका त्याग तपोबल करता, युग युग का निर्माण।

आओ भजे राम का नाम।



वानर रीछ जटायु पक्षी,सब उनके  ही  मित्र।

समतामूलक दृष्टिकोण से ,गढ़ते सदा चरित्र।

शबरी के झूठे बेरों में ,धर्म नीति  के प्राण।

आओ भजे राम का नाम।



साधु संत के यज्ञ सफ़लकर,ऋषियों का उद्धार।

बन्धु बांधवों संग केवट भी, भवसागर से पार।

केवल भृकुटि तनी देखकर,उदधि हुआ निष्प्राण।

आओ भजे राम का नाम।



हुए विष्णु के रूप स्वयं जो,रहे मनुज के रूप।

मर्यादा में युग को बांधा, बनकर जिसने भूप।

दीन दुखी को गले लगाया, थे दुष्टों को बाण।

आओ भजे राम का नाम।



मिथिला के गौरव पर संकट, डूब रहा दिनमान।

शीश झुकाये बैठ गया था,भूपों का अभिमान।

धनुष भंग कर हर लेते हैं,जनकसुता का त्राण।

आओ भजे राम का नाम।



देवराज की करतूतों का ,भार्या को अभिशाप।

नहीं युगों तक सुनने वाला, प्रस्तर का  सन्ताप।

सदियों की अभिशप्त अहल्या,पा जाती है प्राण।

आओ भजे राम का नाम।

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