हम कुछ नया करेंगे

    हम कुछ नया करेंगे

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आशाओं की  नई  भोर  में, नूतन पंख  सजेंगे।

सुर्ख गुलाबी पंखुड़ियों के,फिर से दिन बहुरेंगे।

हम कुछ नया करेंगे। 


चिड़ियों के कलरव से सूना,आँगन  नहीं सुहाता।

और सवेरे कागा भी कब, अपना वचन निभाता।

उम्मीदों पर मिठ्ठू  कायम, स्वागत कर  हरसेंगे। 

हम कुछ नया करेंगे। 


बिना कथानक के  सो जाते, दादी माँ के सपने।

सन्ध्या वन्दन का सुर धीमा,अधर लगे हैं कंपने।

 बूढ़ी काकी की लाठी में, फिर से पर निकलेंगें।

हम कुछ नया करेंगे।


भोर  सुहानी  रोती  देखी,  रातें  लें  अंगड़ाई।

पुरवा के यौवन पर रीझी,पछुवा की तरूणाई।

नयी तूलिका के आँगन में ,नव अरमान भरेंगे।

हम कुछ नया करेंगे।


मुस्काती कैक्टस की मूँछे,घर की बालकनी में।

तुलसी के गमलों से  आयें,  सांसे नागफनी में।

रेगिस्तानी  वातायन  में,  गन्धित पुष्प खिलेंगें।

हम कुछ नया करेंगे।


चौपालों   पर  सन्नाटों  ने, अपना  डेरा  डाला।

अगियानों ने दम तोड़ा है,पीकर गम का प्याला।

वीरानी गलियों  के पग में, घुँघरू मधुर  बजेंगे।

 हम कुछ नया करेंगे।


स्वाति बूँद के संधिपत्र को,चातक ने ठुकराया।

सुरा सुंदरी के अवयव से,डी जे पर इठलाया।

और चकोरों की अंगुली से, चन्दा केश सजेंगे

हम कुछ नया करेंगे।


वीणा के तारों में आयी, नव युग की मादकता।

चम्पा और चमेली तजती,खुशबू की साधकता।

शुष्क तड़ागों में प्रमुदित हो,सरसिज नित विकसेंगे।

हम कुछ नया करेंगे।


वृत्तियों से  छूट कर हम शुद्ध हो जायें।

वश हमारे जब सभी अनिरुद्ध हो जायें।

बन्धनों से छोड़कर  ही यशोधरा राहुल,

त्याग की प्रतिमूर्ति वाले  बुद्ध हो जायें।




टिप्पणियाँ

  1. अति सुन्दर श्लाघनीय प्रस्तुति दी डा साहब

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  2. इसे पढ़कर दिनकर की कविता याद आ गई,,, लाजवाब 👌👌🌷🌹

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  3. अद्भुत अनुपम लेखनी आदरणीय 🙏🙏🥰🤗👌👌👏👏

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  4. बहुत सुंदर शब्द शैली "हम कुछ नया करेंगे" 🙌🙌🙌🙌

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