भूली बिसरी यादें

 *भूली बिसरी यादें*


स्मृतियों के सघन वनों में,प्रियजन से मिलवादें।

अधरों पर मधुरिम शब्दों की, मुस्कानें बिखरादें।

 *भूली बिसरी यादें।* 


कण कण में बिखरी यादों की,पावन कलाकृतियां।

शुष्क मरुस्थल में मुस्काती, उपवन की कलियां।

उस उपवन की सौंधी खुशबू,माटी में बिखरादें।

 *भूली बिसरी यादें।* 


घुँघरू  बाँधे निशा सुंदरी, पदचापों की आहट।

बालकनी से विस्मित झांके,तन्द्रा की अकुलाहट।

मन के आँगन में कुसुमों की,लड़ियाँ खूब सजादें।

 *भूली बिसरी यादें।* 


कलियों के यौवन पर भँवरे, करते हैं मनमानी।

नादानी में प्रेम कहानी,लिखते हैं बचकानी।

उन बचकानी बातों के कुछ, शिलालेख खुदवादें।

 *भूली बिसरी यादें* 


बीती बातों से सन्दर्भित, किस्से   कथा कहानी।

संग्रहालय की चित्रावलि में,रख दी कहीं जवानी।

उन जर्जर उजड़े भवनों को, ताजमहल बनवादें।

 *भूली बिसरी यादें।* 


नयन कोर में कहीं विराजित,है आभा पूनम की।

गोविन्दम को अर्घ्य चढ़ाती, ये बूँदे शबनम की।

पलकों रूपी मखमल चादर ,पथ में आज बिछादें।

 *भूली बिसरी यादें।* 


प्रेम सरोवर में उतराते, नित रातों के सपने।

गहराई में उतर खोजते, जो चले गए अपने।

अपनेपन की उस ममता में, गंगाजल मिलवादें।

 *भूली बिसरी यादें।*

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