*डॉ राजीव कुमार पाण्डेय* (WORLD RECORD HOLDER) गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज FIRST ONLINE POETRY SHOW ON THE THEME OF BHARAT RATNA इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज (MAXIMUM POETS RECITED FOR ASHOK CHAKRA RECIPIENTS IN A VIRTUAL EVENT) लन्दन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड DWADASH JYOTIRLING MAHIMA-single hindi poetry anthology on sanatan culture माता का नाम- श्रीमती उमादेवी पाण्डेय पिता का नाम- स्व.श्री ब्रह्मानन्द पाण्डेय जन्म तिथि - 05-10-1970 जन्मस्थान- ग्राम व पोस्ट -दरवाह,जनपद-मैनपुरी शिक्षा- एम.ए. (अंग्रेजी,हिन्दी) बी.एड., पी-एच.डी. लेखन विधा- गीत, ग़ज़ल,मुक्तक,व्यंग्य,छंद,हाइकु, लेख,कहानी,उपन्यास,ब्लॉग,इंटरव्यू,समीक्षा आदि प्रकाशित कृतियां- आखिरी मुस्कान (सामाजिक उपन्यास)2013 बाँहों में आकाश ( सामाजिक उपन्यास)2018 ...
कामदेव के सुत आएं हैं,पतझड का दुख हरने। बांध पैंजनी बसुधा मचली, उनका स्वागत करने। सिर पर भावों की कलसी ले,अलसी नर्तन करती। पीत वस्त्र में सजकर बैठी,सरसों आँहें भरती। मदनदेव जी हुए अवतरित, तरुणी लगी सँवरने। वातायन को गन्धित करते,सुर्ख गुलाबी पल्लव। आम्रमंजरी पर मुग्धित है,धरती का हर अवयव। बौराई अरहर की कलियां ,यौवन लगा निखरने। पेड़ों की शाखायें गुंजित ,खगकुल के रागों से। भृमरों के गुंजन में आती, अब सांसें बागों से। गजराजों की उठी सूड़ लखि,कमल लगे हैं झरने। कामशास्त्र में चर्चा वर्णित,सुवसन्तक उत्सव की। प्रेम शास्त्र को पढ़ी गोपियां, सुनती कब उद्धव की। पँचसरों के अभिसारण से,रति का आंगन भरने।
*जय जय माँ अम्बे* श्रद्धा से घट स्थापना,अपनी करुण पुकार। वरदहस्त सिर पर रखो,हमको करो दुलार। जय जय माँ अम्बे । वृषभ पर आरूढ़ हैं, ले 'कर' में त्रिशूल। शैल पुत्री धारण करें, दूजे 'कर' में फूल। योगीजन विकसित करें,चक्रीय मूलाधार। जय जय माँ अम्बे। जिनके वृत से फल मिले,तप त्याग वैराग्य। ब्रह्म चारिणी पूजकर , मिलता है सौभाग्य। दूजे दिन की साधना, करें सुखी संसार। जय जय माँ अम्बे । सिंह सवारी स्वर्ण रंग, अर्द्ध चंद्र है माथ। तृतीय शक्ति आराधना, दें जीवन में साथ। परम पदों के हित रहे, आराधन अधिकार। जय जय माँ अम्बे। मन्द हंसी अधरों रखें, कूष्माण्डा का रूप। श्रद्धा से चौथे दिवस, अर्चन वन्दन धूप। सुख समृद्धि देकर करें,भवसागर से पार। जय जय माँ अम्बे। शुभ्र वर्ण कमलासिनी,जननी भगवन स्कंद। चित्तवृत्ति रहती नहीं, आराधन से मन्द। पंचम दिन की शुद्धि भी, देती जग से तार। जय जय माँ अम्बे। कात्यायनि फलदायिनी,करें अलौकिक तेज। छठवें दिन आशीष को, अन्तस रखें सहेज। सर्वस्व न्योछावर ...
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