तथास्तु - निगेटिव हो जाओ
एक बार एक कहावत सुनी थी कि प्रभु के समक्ष जो माँगते हैं वही मिलता है। उदाहरण के लिये प्रभु का हाथ हमेशा ऊपर होता है आशीर्वाद की मुद्रा में । जब कहते हैं कि प्रभु हम जीत जाएं तो प्रभु वहीं से कहते हैं 'तथास्तु', अर्थात ऐसा ही हो , और यदि कहीं निकल गया प्रभु हम कहीं हार न जाएं। प्रभु फिर भी वही कहेंगे 'तथास्तु' अर्थात अब हमारे ऊपर है कि हम किस पर 'तथास्तु' कहलाना है।
किसलय के दिमाग में यही चल रहा था कुन्तु आज कुछ ज्यादा ही चल रहा था पता नहीं एक कहानी कहाँ से उसके दिमाग मे घुस गयी जो सहसा निकल ही नहीं रही थी।
किसलय बचपन से बड़ी होनहार थी,अपनी कक्षा में अब्बल आया करती थी। सभी साथी उसका लोहा मानते थे। और पूरे वर्ष इस बात की प्रतिस्पर्धा रहती थी कि अब्बल कौन आएगा।
लेकिन उनके मन में वही रहता था कि कक्षा में अब्बल ही आना है। इसीलिए शायद उसे 'तथास्तु' का वरदान मिलता रहा।
इधर किसलय इसी सोच में डूबी अपने परिवार की और आस पड़ौस की सेवा में लगी हुई थी। उसका पूरा परिवार और कुछ पड़ौसी भी कोरोना संक्रमण की चपेट में थे ।घर के सभी सदस्य पॉजिटिव पाये गए थे केवल किसलय को छोड़कर। सभी अपने कमरों में कैद अर्थात आसोलेशन में।
वही बची इकलौती किसलय सेवा के लिये। पूरे दिन बिना थके लगी रहती सभी की सेवा में। यही माता पिता ने सिखाया भी था कभी घबराना नहीं चाहिये जिन्दगी संघर्षो का नाम है। जिंदगी के इन संघर्षो ने किसलय को मजबूत इरादों की स्वामिनी बना दिया था। तभी आने परिवार व पड़ौसी की सेवा कर या रही थी।
जब सभी को भोजन दवा इत्यादि उनके कमरों के सम्मुख रख दिया तो आकर बाहर कुर्सी पर बैठ गयी। कुछ थक भी गयी थी थोड़ी आँखे बंद सी हो रही थी। यकायक उसके चिंतन में एक पुरानी घटना ताजा हो गयी।
जब वह छोटी थी तब उसके पिता परमेश्वर दयाल उसे कंधे ओर बैठाल कर उसे स्कूल छोड़ने जा रहे थे क्योंकि किसलय को काफी तेज बुखार था। और उसकी कक्षा का आखिरी पेपर था।
पापा ने कई बार मना भी किया "कोई बात नहीं बेटा एक पेपर छूट भी जाएगा तो कोई बात नहीं उसमें मेडीकल लगा दिया जाएगा। अगले वर्ष फिर मौका मिल जाएगा।"
"पापा नहीं आपने ही सिखाया है कि जिंदगी में अंतिम सांस तक कभी हार नहीं माननी चाहिए फिर आज ऐसा क्यों बोल रहे हो।" किसलय ने अनुनय के साथ कहा अपने पापा से।
पापा मना भी नहीं कर पा रहे थे कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा। फिर भी अपनी बात को रखते हुए कहा -
"बेटा आज तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है बुखार बहुत तेज है मैंने इसलिए कहा और कोई बात नहीं।"
नहीं पापा एक खुराक जो दवा रखी थी मैंने ले ली है। मुझे किसी तरह स्कूल पहुँचा दो मैं पेपर बहुत जल्दी हल कर दूँगी आप मुझे ले आना।"
"आखिर जिद क्यों कर रही हो बेटा मान भी जाओ।"
"प्लीज पापा मेरा रिकॉर्ड खराब हो जाएगा अब्बल आने का,प्लीज।"
अधिकांश पापा ऐसे ही होते हैं जो अपने बच्चों की जिद के आगे झुक जाते है ,यहाँ जिद किसी खराब चीज को लेकर नहीं बल्कि कैरियर को लेकर थी हाईस्कूल की एक्जाम जो थी।
अनमने मन से कहा
"ठीक है किसलय तू नहीं मानती है तो ऐसा ही करूँगा।"
अपनी साइकिल पर बैठालकर चल दिये लेकिन रास्ते में साइकिल खराब होने के कारण उसे वहीं छोड़ दिया। उसे अपने कंधों ओर बैठलकर परीक्षा केंद्र तक जैसे तैसे पहुंचाया।
अब किसलय ठीक हो चुकी थी वार्षिक परीक्षाफल घोषित हो चुका था। अपने क्लास में इस बार भी अब्बल थी।
सभी अभिभावकों को और प्रतिभाशाली बच्चों को स्कूल में सम्मानित किया जाना था।
समय पर पहुँच गए । स्टेज पर किसलय का नाम पुकारा गया। इस आशय के साथ अपने विचारों से सभी को अवगत कराएं ।
"मेरे सभी गुरुजनों साथियों आज एक बात कहना चाहती हूँ। जब मैं बहुत अस्वस्थ थी फिर भी पेपर देने आयी मेरे पापा किस प्रकार कंधों पर बैठालकर लाये थे। मैं भूली नहीं हूँ। मेरे अंदर जीत का जुनून पैदा करने वाले मेरे पापा ही है। मेरे गुरुजनों का आशीर्वाद हमेशा साथ रहा है।
मुझे सिखाया गया है पूरी लगन से काम करो पूरी श्रद्धा से अंजाम दो। जिंदगी में कभी भी निगेटिव मत बनो सदा पॉजिटिव रहो। इसलिए आज मैं यह स्थान ग्रहण कर पाई हूँ । "
तालियां गूँजने लगी। पूरा सभागार उसकी प्रशंसा कर रहा था उसके माता पिता को दुआएं दे रहा था।
तालियों की गड़गड़ाहट से किसलय की तन्द्रा टूट गयी। ये तालियां कहीं और नहीं बल्कि उसके मकान के बाहर कुछ साथी उसके बजा रहे थे।
बाहर निकल कर देखा तो उसके गाँव के कुछ साथी मास्क लगाए हुए उसे पुकार रहे थे।
"किसलय आज इस जंग में हम सब आपके साथ है। हम सब मिलकर इस जंग में एक दूसरे का हाथ बंटाएँगे और जो भी पॉजिटिव हैं उनकी सेवा करेंगे।"
किसलय के नेत्रों में आँसू भर आये। ये वही क्लास के साथी हैं जो उसके प्रतिद्वंद्वी थे पढ़ाई में।
आज उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस जंग में साथ देना चाहते थे। जब अपने परिवार के लोग भाग रहे हों मुँह चुरा रहे हों कहीं कोने में जाकर छिप रहे हों तब यह टोली उनके साथ खड़ी है। यही पॉजिटिव सोच आज फिर पॉजिटिव के खिलाफ लड़ने के लिये तैयार खड़ी थी।
किसलय अपने साथियों का प्यार पाकर धन्य हो गयी। इस विषम परिस्थितियों में भी अच्छे लोगों की कमी नहीं है। जिंदगी भर जिस पॉजिटिव सोच से काम किया वही आज निगेटिव के लिये काम करने को तैयार थी।
सभी साथी मिलकर काम करने की योजना बना ही रहे थे तभी किसलय के मोबाइल पर कुछ मैसेज आये जिसे देखने लगी।
ये मेसेज पैथोलॉजी लैब से आये थे उत्सुकता बढ़ गयी। जल्दी ही देखने लगी उसमें उसके परिवार की आर टी पी सी आर रिपोर्ट थीं।
आज सभी रिपोर्ट निगेटिव जो आयीं थीं।
किसलय ने आज अपने मित्रों से पहली बार निगेटिव की खुशियां मनाई। यह निगेटिव लाख पॉजिटिव से बढ़ा था।
सभी साथी भी इस निगेटिव को उत्सव मानने लगे। प्रभु से कई दिन से यही प्रार्थना कर रही थी प्रभु निगेटिव कर दो।निगेटिव कर दो। इस जहान को निगेटिव करदो।
प्रभु ने वही निगेटिव का वरदान उसकी रिपोर्ट में "तथास्तु" लिखकर भेज दिया था।
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